Saturday, August 30, 2014

मेरे करार में नसीब बेकरारी है

इस मकान में घर की तलाश जारी है
मेरे करार में  नसीब  बेकरारी है 

इंसान का चेहरा और दिल संग सा लिए  
मेरे हमनवाज़ों की क्या अदाकारी है

मेरे करार में  नसीब  बेकरारी है

रिश्ते तोड़ के जीत जाना  तो आसान था  
बचाने को रिश्ते हमने दिलकी बाज़ी हारी है

मेरे करार में  नसीब  बेकरारी है

जिस्म का मिलना भी कोई मिलना है
रूह से रूह की जो अगर पर्दागारी  है

मेरे करार में  नसीब  बेकरारी है

रहकर जिन्दा  न हमें मिल सका सुकू
मौत को अब मयस्सर जिंदगी हमारी है

मेरे करार में  नसीब  बेकरारी है

इस मकान में घर की तलाश जारी है


मेरे करार में  नसीब  बेकरारी है 

भावार्थ











Wednesday, August 20, 2014

मंजिलें क्या है रास्ता क्या है

मंजिलें क्या है रास्ता क्या है
हौंसला हो तो फासला क्या है

वो सजा दे कर दूर जा बैठा
इससे  पूछो मेरी सजा क्या है

जब भी चाहेगा छीन लेगा वो
सब उसीका है आपका क्या है

तुम हमारे करीब बैठे हो
अब दुआ कैसी और दवा क्या है

चांदनी आज किसलिए कम है
चाँद की आँख में चुभा क्या है

मंजिलें क्या है रास्ता क्या है
हौंसला हो तो फासला क्या है

आलोक श्रीवास्तव